Pharma Innovation Programme|| केंद्रीय बजट:हिमाचल के दवा उद्योग
भारत वैश्विक फर्मास्युटिकल क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यदि सही कदम उठाए जाएँ और उपयुक्त तरीके से संपोषण किया जाए तो भारत वैश्विक फर्मास्युटिकल बाज़ार में अग्रणी देश बन सकता है। भारतीय फार्मा उद्योग की अगली उपलब्धि नवाचार के इर्द-गिर्द केंद्रित होनी चाहिये।
हालाँकि, जेनेरिक से आगे जाने और नवाचार लाने के लिये फार्मा उद्योग को R&D टैक्स ब्रेक, पेटेंट कानून में बदलाव त्तथा अनुसंधान प्रतिभा के रूप में नीति समर्थन की आवश्यकता होगी।
केंद्रीय बजट में हिमाचल प्रदेश के दवा उद्योग को रिसर्च और इनोवेशन प्रोग्राम का ही सहारा मिला। छोटे उद्योगों को कोरोनाकाल में जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई की उम्मीद पूरी नहीं हो पाई। छोटे दवा उद्योगों को उम्मीद थी कि कोरोना काल में उन्हें जो नुकसान हुआ था, उसकी नए बजट में कुछ भरपाई होगी। कोविड के समय में कांट्रेक्ट सप्लाई न करने पर पेनल्टी वापस करने की घोषणा, ई समाधान में केवाईसी के प्रावधान का सरलीकरण, लाइसेंस के लिए डिजिटल लॉकर की घोषणा, माइक्रो इंडस्ट्री के लिए कर्ज की सीमा बढ़ाने की घोषणा और तीन करोड़ तक के टर्नओवर वाले एमएसएमई को टैक्स में राहत देने का स्वागत किया है।
भारत उद्योग संघ के हिमाचल इकाई के अध्यक्ष चिरंजीव ठाकुर ने कहा कि फार्मा के लिए इस बजट में कोई भी घोषणा नहीं हुई है। दवा उद्योग कोरोना में भी उत्पादन करते रहे और लोगों को समय पर दवाई पहुंचाते रहे। कच्चा माल महंगा होने के बावजूद भी नुकसान उठाकर छोटे उद्योगों ने सभी आर्डर पूरे किए, लेकिन इस बजट में दवा उद्योगों को निराशा ही हाथ लगी। हिमाचल दवा निर्माता संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने कहा कि दवा उद्योगों में रिसर्च और इनोवेशन के लिए बजट मुहैया कराया गया है जो अच्छी बात है लेकिन इसके अलावा दवा उद्योगों के कुछ नहीं हुआ।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें